कविता१ मिनट
मुन्ने की सायकिल

मुन्ने ने एक दिन मुझसे एक नया सायकिल माँगा,
मैंने बॉल को उसी के कोर्ट में डालकर मामले को यूँ टांगा।
यदि तुम अपने क्लास में फ़र्स्ट आओ,
बेशक सायकिल एक नया ले आओ।
मायूस मुन्ना कुछ नहीं बोल पाया,
अनायास उसने मुझे खिड़की पर बुलाया।
सामने सड़क पर जो बच्चे खेल रहे हैं,
कई बच्चे एक दूसरे को ठेल रहे हैं।
कुछ आगे, कुछ पीछे, कुछ मेरे क्लास में पढ़ते हैं,
ये सभी हर दिन सायकिल पर भी चढ़ते हैं।
ये सायकिल इनके पापा ने दिए होंगे।
ये सब एक साथ प्रथम कैसे आए होंगे।

