

कविता, मगर
आज की ज़ुबान में।
हर सुबह एक नई कविता, एक नया विचार, स्याही और काग़ज़ से आपकी स्क्रीन तक।
मरना तो तय है, तुम्हें किसका भय है?


हर सुबह एक नई कविता, एक नया विचार, स्याही और काग़ज़ से आपकी स्क्रीन तक।
मरना तो तय है, तुम्हें किसका भय है?